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आरक्षण की आग से खोखला होता देश.... संजय साहू  जबलपुर मो. 9407320905 हम आजादी की 68 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं, इन 68 सालों में हमारे देश ने अनेक प्रकार की विपदायें झेली हैं। इन विपदाओं के बाद भी आज हम मजबूती से खड़े तो दिखाई दे रहे हैं किन्तु वास्तविकता पर गौर करें तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आज भी हम मानसिक गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुये हैं। दुनिया जहां 21 वीं सदी को पार करने में सक्षम हो रही है, उस स्थिति में सरकार लाख दावे करे कि हमारा देश विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है, लेकिन वास्तविकता क्या है ये बात हम सभी जानते हैं कि, हम आज भी 19 सदी में ही जी रहे हैं। जिसमें कुपोषण है, बेरोजगारी है, भुखमरी है, गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीर और अमीर। आज भी देश का युवा बेरोजगारी के दलदल में फंसा हुआ है, किसान आत्महत्या करने बेबस है, आंतकवाद अपनी पराकाष्ठïा को पार करने में तुला हुआ है। कर्ज पर कर्ज बढ़ता ही जा रहा है, सर्व सुविधा सम्पन्न होने के पश्चात भी हमारी अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।  हमारा समाज पैसों की हवस में इतना अंधा होता जा रहा है ...

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मंदिरों की संपत्ति से हो सकता देश कर्ज मुक्त संजय साहू जबलपुर प्राचीन समय से भारत जैसे विशाल देश में भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा रही है, मान्यताओं के अनुसार आदमी अपने स्वभाव अनुरू मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान को कोई न कोई भेंट अर्पण करता है और यही कारण है कि देश के अनेक मंदिर ऐसे हैं जहां बेहिसाब संपत्ति रखी हुई, इस संपत्ति का न तो कोई उपयोग हो रहा है और न ही वह किसी आदमी या संस्था के काम आ रही है, अरबों खरबों रूपये की इस संपत्ति पर सरकार का भी कोई नियंत्रण नहीं है। आज हमारी अर्थ व्यवस्था विश्व की अर्थ व्यवस्था से थोड़ी भिन्न होने के साथ विश्व की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था में शुमार है लेकिन सत्ता लोलुप नेताओं ने इस समाज को ही नहीं वरन् भारत की वर्जनाओं को भी तोड़ा है, उसी का परिणाम है कि आज देश के ऊपर अरबों रूपये का कर्ज लदा हुआ है, प्रत्येक व्यक्ति देश को इस कर्ज से मुक्त तो होना देखना चाहता है लेकिन खुद का कोई योगदान इसमें नहीं करता और सरकार से आशा लगाये रहता है, कि वह ही इस देश को कर्ज मुक्त करे, जबकि वोटों की भूखी सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है कि कभी सोने की चिडिय़ा कहा जाने...