क्या संविधान में खामी में है, न्यायालीन प्रक्रिया पर भरोसा नहीं... आखिर क्यों दिया जा रहा प्रोटेक्टशन एक्ट संजय साहू पत्रकार भारत के संविधान निर्माताओं ने जब संविधान की रचना की थी उस समय संविधान रूपी इस ग्रंथ को विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान माना गया था। समय बीतता गया, इसमें जितनी भी सरकारें आर्इं अपनी मनमर्जी के मुताबिक संसोधन करती रहीं। हालात यह है कि संविधान के अनुरूप अब हमारा न तो आचरण रह गया है और न ही उसके अनुसार हम चल पा रहे हैं। इसका वास्तविक कारण क्या है किसी की समझ में नहीं आ रहा है। आ रहा है तो सिर्फ राजनेताओं को जो अपने फायदे के लिये और वोटों की खातिर परिवर्तन करते रहते हैं। पहले अनुसूचित जाति/ जनजाति के अलग से एससी/एसटी एक्ट बनाया गया। उसके बाद सरकारी कर्मचारियों के लिये अलग आचार संहिता, फिर डॉक्टरों के लिये प्रोटेक्टशन एक्ट अब वकीलों के लिये प्रोटेक्टशन एक्ट की व्यवस्था दी जा रही है। इन व्यवस्थाओं से आम जनता के मन में एक सवाल उठने लगा है, कि क्या भारत के संविधान व न्यायालय में इनको भरोसा नहीं है। अगर नहीं तो फिर क्यों आम जनता के लिये इस प्रकार के कानून बनाये गये है...