यह वोट बैंक की राजनीति और भारत का भविष्य
क्यों गर्त में धकेल रहे हैं देश को नेता
संजय साहू पत्रकार
हम आजादी की 72 वी सालगिरह मनाने जा रहे हैं। बीते 72 साल में भारत ने बहुत तरक्की की है। टेक्नोलॉजी की दुनिया में आज हम नंबर वन बनने की दौड़ में शामिल है। परंतु इसके बावजूद भारत की 125 करोड़ जनता को आजादी का स्वरूप नजर नहीं आया है, जिसे देखने के लिए आजादी की लड़ाई में हमारे क्रांतिकारियों ने अपनी आहुति दी थी। संविधान के निमार्ताओं ने भारत को अति पिछड़े क्षेत्र में रहने वाले दलित आदिवासियों के लिए 10 वर्ष का आरक्षण दिया था इसमें यह शर्त रखी गई थी की अगर 10 वर्षों के पश्चात भी उनका पिछड़ापन गरीबी दूर नहीं होती तो नए सिरे से आरक्षण पर व्याख्या कर नया संशोधन लागू किया जा सकता है। किंतु वोट बैंक की राजनीति में राजनीतिक दलों को इतना पंगु बना दिया है कि आज वह आरक्षण पूरे देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने लगा है। वर्तमान में देश के प्रत्येक व्यक्ति को आरक्षण का लाभ चाहिए फिर वह क्रीमी लेयर हो, अति पिछड़ा, पिछड़ा, या दलित-आदिवासी के साथ सामान्य श्रेणी का व्यक्ति हो। ये सब आरक्षण को लेकर अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगा है। यही कारण है कि आज देशभर में आरक्षण के आंदोलन तेजी से पनपने लगे हैं फिर चाहे वह राजस्थान का गुर्जर आंदोलन हरियाणा का जाट गुजरात का पटेल या महाराष्ट्र मराठा यह ऐसे आंदोलन हो चुके हैं जो अपने आप में एक हिंसक का रूप ले चुके हैं। जतीय समीकरणों में बंट चुके भारत को राजनैतिक दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्वार्थ के लिये हमेशा से इसका उपयोग किया है।
एक तरफ तो सामान व्यवहार की बात करते हैं वहीं दूसरी और आरक्षण का लाभ देकर उन्हें विभाजित भी कर रहे हैं। यह दोहरी मानसिकता ही हमारे देश को दीमक की तरह खोखला कर रही है। आज भारत व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से पूरे विश्व की निगाहों में है। लेकिन यहां की प्रतिभा आज भी पलायन करने मजबूर हो रही है। प्रतिभाओं के बगैर देश अंधेर नगरी चौपट राजा जैंसी स्थिति में पहुंचता जा रहा है।
जनता की उदासीनता
देखने में आया है कि आम जनता को जैंसे देश से कोई मतलब ही नहीं है। सबको लगता है कि जो कुछ भी करे सरकार या उसमें बैठे आदमी ही करें, या किसी बात को लिखना है तो मीडिया उसकी भूमिका निभाये। अगर नेता कुछ नहीं कर पाता तो कहा जाता है कि वह पंगु है, वहीं मीडिया के संदर्भ में भी कुछ इस प्रकार की ही भाषा का प्रयोग होता। परंतु आज तक जनता द्वारा किसी बात को लेकर कोई जनांदोलन या सरकार को पत्र नहीं लिखा गया कि सरकार द्वारा लिया जा रहा यह निर्णय आम जनता के विरूद्व है। ये जनता की ही उदासीनता का परिणाम है कि वर्तमान में हालात तो नहीं बदले परंतु देश जरूर जतीय समीकरणों में बंट रहा है। ये नेताओं का ही चरित्र है कि वोटों की खातिर उन्होंने उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाये नये कानून के ऊपर अपना कानून बना दिया है। जिससे उनका वोट बैंक न बदले।
-----------------------------------------------
क्यों गर्त में धकेल रहे हैं देश को नेता
संजय साहू पत्रकार
हम आजादी की 72 वी सालगिरह मनाने जा रहे हैं। बीते 72 साल में भारत ने बहुत तरक्की की है। टेक्नोलॉजी की दुनिया में आज हम नंबर वन बनने की दौड़ में शामिल है। परंतु इसके बावजूद भारत की 125 करोड़ जनता को आजादी का स्वरूप नजर नहीं आया है, जिसे देखने के लिए आजादी की लड़ाई में हमारे क्रांतिकारियों ने अपनी आहुति दी थी। संविधान के निमार्ताओं ने भारत को अति पिछड़े क्षेत्र में रहने वाले दलित आदिवासियों के लिए 10 वर्ष का आरक्षण दिया था इसमें यह शर्त रखी गई थी की अगर 10 वर्षों के पश्चात भी उनका पिछड़ापन गरीबी दूर नहीं होती तो नए सिरे से आरक्षण पर व्याख्या कर नया संशोधन लागू किया जा सकता है। किंतु वोट बैंक की राजनीति में राजनीतिक दलों को इतना पंगु बना दिया है कि आज वह आरक्षण पूरे देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने लगा है। वर्तमान में देश के प्रत्येक व्यक्ति को आरक्षण का लाभ चाहिए फिर वह क्रीमी लेयर हो, अति पिछड़ा, पिछड़ा, या दलित-आदिवासी के साथ सामान्य श्रेणी का व्यक्ति हो। ये सब आरक्षण को लेकर अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगा है। यही कारण है कि आज देशभर में आरक्षण के आंदोलन तेजी से पनपने लगे हैं फिर चाहे वह राजस्थान का गुर्जर आंदोलन हरियाणा का जाट गुजरात का पटेल या महाराष्ट्र मराठा यह ऐसे आंदोलन हो चुके हैं जो अपने आप में एक हिंसक का रूप ले चुके हैं। जतीय समीकरणों में बंट चुके भारत को राजनैतिक दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्वार्थ के लिये हमेशा से इसका उपयोग किया है।
एक तरफ तो सामान व्यवहार की बात करते हैं वहीं दूसरी और आरक्षण का लाभ देकर उन्हें विभाजित भी कर रहे हैं। यह दोहरी मानसिकता ही हमारे देश को दीमक की तरह खोखला कर रही है। आज भारत व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से पूरे विश्व की निगाहों में है। लेकिन यहां की प्रतिभा आज भी पलायन करने मजबूर हो रही है। प्रतिभाओं के बगैर देश अंधेर नगरी चौपट राजा जैंसी स्थिति में पहुंचता जा रहा है।
जनता की उदासीनता
देखने में आया है कि आम जनता को जैंसे देश से कोई मतलब ही नहीं है। सबको लगता है कि जो कुछ भी करे सरकार या उसमें बैठे आदमी ही करें, या किसी बात को लिखना है तो मीडिया उसकी भूमिका निभाये। अगर नेता कुछ नहीं कर पाता तो कहा जाता है कि वह पंगु है, वहीं मीडिया के संदर्भ में भी कुछ इस प्रकार की ही भाषा का प्रयोग होता। परंतु आज तक जनता द्वारा किसी बात को लेकर कोई जनांदोलन या सरकार को पत्र नहीं लिखा गया कि सरकार द्वारा लिया जा रहा यह निर्णय आम जनता के विरूद्व है। ये जनता की ही उदासीनता का परिणाम है कि वर्तमान में हालात तो नहीं बदले परंतु देश जरूर जतीय समीकरणों में बंट रहा है। ये नेताओं का ही चरित्र है कि वोटों की खातिर उन्होंने उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाये नये कानून के ऊपर अपना कानून बना दिया है। जिससे उनका वोट बैंक न बदले।
-----------------------------------------------
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें